Supreme Court Aravali Hills Judgment 2025 | अरावली खनन पर ऐतिहासिक फैसला

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: अरावली पहाड़ों की परिभाषा और खनन पर दिशा-निर्देश (2025)

20 नवम्बर 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं पर्यावरणीय प्रश्न पर निर्णय दिया। यह निर्णय T.N. Godavarman Thirumulpad बनाम भारत संघ वाद से उत्पन्न हुआ, जिसमें न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न था कि अरावली पहाड़ों की वैज्ञानिक परिभाषा क्या हो तथा खनन गतिविधियों को किस सीमा तक अनुमति दी जा सकती है!
यह फैसला पर्यावरणीय न्यायशास्त्र (Environmental Jurisprudence) के क्षेत्र में एक निर्णायक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है!

अरावली पर्वतमाला का पारिस्थितिक महत्व

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अरावली पर्वतमाला विश्व की प्राचीनतम भू-आकृतिक संरचनाओं में से एक है। इसका पर्यावरणीय महत्व बहुआयामी है—यह न केवल थार मरुस्थल के विस्तार को रोकती है, बल्कि उत्तर भारत की जलवायु, जैव-विविधता तथा भूजल संरचना को भी स्थिर बनाए रखती है!
अरावली क्षेत्र में अनेक वन्यजीव अभयारण्य, आर्द्रभूमियाँ तथा भूमिगत जलभृत (Aquifers) स्थित हैं, जो कृषि, पेयजल और स्थानीय आजीविका के लिए अत्यंत आवश्यक हैं!

अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का संदर्भ

भारत द्वारा 1996 में अनुमोदित United Nations Convention to Combat Desertification (UNCCD) के अंतर्गत भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण को रोकना एक अंतरराष्ट्रीय दायित्व है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण इन दायित्वों की पूर्ति का अभिन्न अंग है!
इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई Aravali Green Wall Project जैसी योजनाओं को न्यायालय ने नीतिगत समर्थन प्रदान किया !

विवाद की पृष्ठभूमि

वर्षों से अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर विवाद बना रहा है ! मुख्य समस्या यह थी कि विभिन्न राज्यों द्वारा अरावली की भिन्न-भिन्न परिभाषाएँ अपनाई गई थीं, जिससे अवैध और अनियंत्रित खनन को बढ़ावा मिला !
इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने Central Empowered Committee (CEC) तथा बाद में पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति से रिपोर्ट तलब की !

अरावली की परिभाषा: न्यायिक विश्लेषण

Forest Survey of India द्वारा प्रस्तावित परिभाषा अपेक्षाकृत व्यापक थी, जबकि MoEF&CC की समिति ने ऊँचाई एवं भू-आकृतिक निकटता के आधार पर एक कार्यात्मक परिभाषा प्रस्तुत की !
यद्यपि इस परिभाषा पर यह आपत्ति उठी कि इससे कुछ निम्न ऊँचाई वाले क्षेत्र खनन हेतु खुल सकते हैं, न्यायालय ने यह माना कि समिति की परिभाषा प्रशासनिक रूप से अधिक व्यावहारिक है, बशर्ते उस पर कठोर पर्यावरणीय नियंत्रण लागू हों !

सतत खनन और MPSM की अवधारणा

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि पूर्ण खनन प्रतिबंध समाधान नहीं है, क्योंकि इससे अवैध गतिविधियाँ पनप सकती हैं ! इसके स्थान पर Management Plan for Sustainable Mining (MPSM) को अनिवार्य किया गया !
ICFRE द्वारा तैयार किया जाने वाला यह प्लान यह निर्धारित करेगा कि:
• किन क्षेत्रों में खनन पूर्णतः निषिद्ध रहेगा
• किन क्षेत्रों में सीमित एवं नियंत्रित खनन संभव होगा
• खनन पश्चात पुनर्स्थापन (Restoration) कैसे किया जाएगा
जब तक यह योजना अंतिम रूप नहीं लेती, तब तक किसी भी नए खनन पट्टे की अनुमति नहीं दी जाएगी !

न्यायालय के अंतिम निर्देश

aravali hills supreme court judgment 2025 1

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में निम्नलिखित स्पष्ट निर्देश दिए:

  1. अरावली पहाड़ों की नई परिभाषा को स्वीकार किया गया
  2. कोर एवं इनवायोलेट क्षेत्रों में खनन निषिद्ध रहेगा
  3. वर्तमान वैध खनन गतिविधियाँ सख्त पर्यावरणीय शर्तों के अधीन जारी रह सकेंगी
  4. MPSM लागू होने के बाद ही भविष्य में खनन की अनुमति दी जाएगी

यह निर्णय भारत में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है। यह न केवल अरावली पर्वतमाला को संरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि विकास तभी सार्थक है जब वह पारिस्थितिक संतुलन के साथ हो !

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ों की एक समान परिभाषा तय करते हुए कोर क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध और सतत खनन के लिए MPSM अनिवार्य किया !

Q2. क्या अरावली क्षेत्र में पूरी तरह खनन बंद कर दिया गया है?
नहीं, केवल संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों में खनन प्रतिबंधित है। मौजूदा वैध खनन सख्त शर्तों के साथ जारी रह सकता है !

Q3. MPSM क्या है?
Management Plan for Sustainable Mining एक वैज्ञानिक योजना है जो यह निर्धारित करती है कि खनन कहाँ और किस प्रकार किया जा सकता है !

Q4. यह फैसला पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह अरावली पर्वतमाला की जैव-विविधता, जल स्रोतों और जलवायु संतुलन की रक्षा सुनिश्चित करता है !

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